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जिला पंचायत में 36 घंटे धरना देने वाले 10 किसान तहसीलदार कोर्ट में हुए पेश, किसानों ने कार्रवाई को बताया गलत, प्रशासन बोला- भविष्य में बिना अनुमति प्रदर्शन न करने की बात मानी


हरदा। जिला मुख्यालय स्थित जिला पंचायत परिसर में पिछले दिनों समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की मांग को लेकर किसानों द्वारा किए गए प्रदर्शन के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। बिना अनुमति के सरकारी कार्यालय परिसर में करीब 36 घंटे तक धरना देने के आरोप में जारी किए गए नोटिस को लेकर आज 10 किसान हरदा तहसीलदार कार्यालय में पेशी पर पहुंचे। कोर्ट में पेशी के दौरान किसानों और प्रशासन दोनों ने अपना-अपना पक्ष रखा।

अपनी बात रखने आए थे, प्रशासन ने गलत मामला दर्ज किया: किसान

तहसीलदार कार्यालय में पेशी पर पहुंचे किसान रामजीवन जाट और आनंद जाट ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया। किसानों का आरोप है कि वे कोई उपद्रव करने नहीं, बल्कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की अपनी जायज मांग को लेकर और प्रशासन के सामने अपनी बात रखने के लिए हरदा जिला मुख्यालय आए थे। किसानों ने कहा कि जिला प्रशासन ने गलत तरीके से किसानों पर यह मामला दर्ज किया है और उन्हें परेशान करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।

बिना अनुमति सरकारी दफ्तर में लंबा धरना देना गलत: तहसीलदार

इस पूरे मामले पर हरदा तहसीलदार राजेंद्र पवार का कहना है कि किसानों को कानून व्यवस्था और शासकीय कार्य में बाधा न आए, इस लिहाज से नोटिस जारी किए गए थे। बिना अनुमति के प्रदर्शन करने और एक महत्वपूर्ण सरकारी विभाग के दफ्तर (जिला पंचायत) के भीतर इतने लंबे समय (करीब 36 घंटे) तक धरना देने के मामले में किसानों को जवाब देने के लिए बुलाया गया था।

तहसीलदार राजेंद्र पवार ने बताया कि आज पेशी के दौरान किसानों ने यह स्वीकार किया है कि भविष्य में उनके द्वारा बिना अनुमति के इस तरह का कोई प्रदर्शन या धरना नहीं किया जाएगा।

क्या था पूरा मामला?

गौरतलब है कि हरदा जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया और पोर्टल में आ रही तकनीकी दिक्कतों से परेशान किसान अपनी मांगों को लेकर जिला पंचायत परिसर पहुंचे थे। वहां किसानों का गुस्सा फूट पड़ा और वे परिसर के भीतर ही धरने पर बैठ गए थे। करीब 36 घंटे तक चले इस हाई-प्रोफाइल धरने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए बिना अनुमति के आंदोलन करने वाले प्रमुख किसान नेताओं और किसानों को चिन्हित कर नोटिस थमाए थे, जिसकी सुनवाई आज तहसील न्यायालय में संपन्न हुई।

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