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आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग, सर्व समाज के पैदल यात्रा करने वाले संतों की सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय नीति बनाने की रखी मांग सकल जैन ने

"जो स्वयं निहत्थे होकर भी मानवता को अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं, उनकी सुरक्षा करना समाज और शासन—दोनों का नैतिक दायित्व है। संत सुरक्षा केवल एक समाज का विषय नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत की सुरक्षा का प्रश्न है।"


हरदा (सार्थक जैन/स्वासिक गंगवाल)। हाल ही में मध्यप्रदेश के रीवा जिले में जैन आर्यिका माताजी के साथ हुई दुखद दुर्घटना के बाद जैन समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों में गहरा आक्रोश एवं चिंता का वातावरण है। इस घटना को लेकर समाजजन लगातार निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा देशभर में पैदल विहार करने वाले सर्व समाज के साधु-संतों की सुरक्षा के लिए स्थायी एवं प्रभावी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

इसी क्रम में श्री दिगंबर जैन संस्था हरदा एवं राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान समिति के तत्वावधान में जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन कलेक्टर सिद्धार्थ जैन एवं संयुक्त कलेक्टर सतीश राय को सौंपा गया ।

ज्ञापन के बारे में जानकारी देते हुए जैन समाज के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन एवं कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि विहाररत साधु-संत किसी भी प्रकार की सुरक्षा, वाहन अथवा भौतिक सुविधाओं का उपयोग नहीं करते और पूर्णतः अहिंसक एवं निहत्थे रहकर समाज को संयम, सदाचार और शांति का संदेश देते हैं। ऐसे में उनके साथ होने वाली दुर्घटनाएं एवं हिंसक घटनाएं केवल किसी एक समाज का नहीं बल्कि देश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय हैं।

ज्ञापन में आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की एस आई टी अथवा न्यायिक जांच कराए जाने की मांग करते हुए कहा गया कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों को कानून के तहत शीघ्र कठोर दंड दिया जाए। समाज का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की साजिश, लापरवाही या सुनियोजित कृत्य के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित आरोपियों पर कठोर कानूनी धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

ज्ञापन में केवल जैन समाज ही नहीं बल्कि सर्व समाज के पैदल विहार करने वाले साधु-संतों की सुरक्षा के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की भी मांग की गई है। प्रस्तावित नीति में विभिन्न धर्मों एवं संप्रदायों के पैदल भ्रमण करने वाले संतों, साधुओं, संन्यासियों और तपस्वियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश, सुरक्षा मानक, संवेदनशील मार्गों की पहचान, प्रशासनिक समन्वय, ट्रैफिक नियंत्रण तथा आवश्यक पुलिस सहयोग जैसी व्यवस्थाएं शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

समाज प्रतिनिधियों ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में पैदल यात्रा एवं विहार करने वाले संत-महात्मा अक्सर राजमार्गों, व्यस्त मार्गों एवं संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभाग एवं सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय स्थापित कर एक प्रभावी सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाना आवश्यक है। इसके लिए प्रत्येक जिले में “संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ तथा 24×7 आपातकालीन संपर्क व्यवस्था स्थापित करने की मांग भी की गई है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि संत-महात्मा आत्मरक्षा के साधनों का उपयोग नहीं करते तथा अहिंसा और त्याग के मार्ग पर चलते हैं, इसलिए उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखकर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई और कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

समाजजनों ने प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की है कि वह इस अत्यंत संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कदम उठाएगा, जिससे संतों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण में दोषियों को शीघ्र न्यायिक प्रक्रिया के तहत कठोर दंड मिल सके।

ज्ञापन के दौरान सुरेन्द्र जैन, महेंद्र अजमेरा, अनूप बजाज, स्वदेश गंगवाल, मुकेश बकेवरिया, सरगम जैन, सचिन सिंघई, प्रदीप अजमेरा, संजय जैन, अर्पित लहरी , हेमंत जैन, सुनील पाटनी, राजीव जैन, आलोक जैन, ऋषभ जैन, नमन बजाज, अभिषेक बड़जात्या, रेणु जैन, उषा बड़जात्या, तनुजा शाह, संध्या बजाज, मिरा जैन, राजुल फणिश, चेतन लहरी, पंकज जैन, रितेश जैन, सिद्धार्थ कटनेरा, गौतम जैन आदि उपस्थित रहे ।

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