CM हेल्पलाइन शिकायतों में लापरवाही पड़ी भारी, नोटिस के बाद भी जवाब नहीं देने पर तहसील कार्यालय में मचा हड़कंप
हरदा। जिले में प्रशासनिक लापरवाही पर अब सख्ती का दौर शुरू हो गया है। कलेक्टर की समीक्षा बैठक में तहसील कार्यालय रहटगांव की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने ओर तहसीलदार का एक सप्ताह का वेतन रोकने के आदेश के बाद तहसीलदार ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर कड़ा प्रहार किया है। CM हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण में लगातार लापरवाही और निर्देशों की अनदेखी करने वाले 4 कर्मचारियों का 7 दिन का वेतन रोकने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
28 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के अनुसार, कलेक्टर हरदा द्वारा आयोजित टीएल बैठक में यह सामने आया कि तहसील कार्यालय रहटगांव में CM हेल्पलाइन से जुड़ी शिकायतों का समय सीमा में निराकरण नहीं किया जा रहा था। कई शिकायतें 50 दिनों से अधिक समय तक लंबित पाई गईं, जबकि “एजिंग माह” की शिकायतों में भी गंभीर लापरवाही बरती गई।
मामले को गंभीर मानते हुए तहसीलदार ने पहले संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन निर्धारित समय तक किसी ने जवाब देना उचित नहीं समझा। इसके बाद तहसीलदार ने “कार्य नहीं तो वेतन नहीं” के सिद्धांत पर कार्रवाई करते हुए 7 दिन का वेतन काटने का आदेश जारी कर दिया। कार्रवाई की जद में आए कर्मचारियों में शाखा प्रभारी शिवम दुबे, डेटा एंट्री ऑपरेटर रुक्मणी हुड्डे, सहायक ग्रेड-3 राजरत्न ठाकुर और पीयूष वर्मा शामिल हैं।
प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई को कलेक्टर की सख्ती के बाद तहसील स्तर पर हुई सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जा रहा है। आदेश जारी होते ही तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया है और अन्य कर्मचारियों में भी जवाबदेही को लेकर चिंता बढ़ गई है।
उल्लेखनीय है कि गत दिवस कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने लापरवाही पर रहटगांव तहसीलदार का एक सप्ताह का वेतन रोकने का आदेश दिया गया था इससे बौखलाकर तहसीलदार द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों का लापरवाही कै आधार पर वेतन रोकने का आदेश जारी किया गया है । सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में लंबित शिकायतों और सरकारी कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।

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