दुनिया का सबसे बडा अपंजीकृत संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सौ साल में नौ दिन चले अढाई कोस की कहावत को झुठला दिया है. जो संघ पिछले 99 साल से सरस्वती शिशु मंदिरों और कुछ महाविद्यालयों के जरिए शाखामृग तैयार कर रहा था,आज सौवें साल में पहले विश्वविद्यालय की आधार शिला रख रहा है.
आप चाहे संघ के समर्थक हों चाहे विरोधी आज संघ को बधाई दे सकते है.
संघ मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अपना पहला विश्वविद्यालय शुरू करने जा रहा है. इसका नाम ऋषि गालव विश्वविद्यालय रखा गया है, संघ के पहले विश्वविद्यालय का भूमि पूजन 4 मई को मप्र के मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने किया. यह विश्वविद्यालय करीब 110 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा, इसे शिवपुरी लिंक रोड के पास 55 बीघा जमीन पर तैयार किया जा रहा है.
मध्य प्रदेश में "शिक्षा शून्य से शिखर तक” के संकल्प के साथ खोले जा रहे इस विश्वविद्यालय का नाम ऋषि गालव के नाम पर रखा गया है.इस विश्वविद्यालय का संचालन मध्य भारत शिक्षा समिति करेगी, जो पहले से ग्वालियर में कई कॉलेज चला रही है। यहां करीब 5000 छात्रों की क्षमता होगी और नर्सिंग, पैरामेडिकल, मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग जैसे कोर्स संचालित किए जाएंगे।
इस पहले संघी विश्वविद्यालय में एडमिशन सत्र 2027-28 से शुरू हो सकते हैं। कैंपस में बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल भी बनाए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट अगले तीन साल में पूरा होने का लक्ष्य है।
कायदे से संघ के पहले विश्वविद्यालय की आधार शिला संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत को या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रखना चाहिए थी लेकिन दोनों बंगाल विजय के अनुष्ठान में व्यस्त हैं इसलिए डा. मोहन भागवत ने डा. मोहन यादव को ये काम सौंपा. इस काम में सरकार का हाथ लगेगा तो परियोजना जल्द आकार लेगी.
आपको पता ही है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का एक भारतीय दक्षिणपंथी हिंदुत्व स्वयंसेवी अर्धसैनिक संगठन है.यह संघ परिवार नामक हिंदुत्व संगठनों के एक बड़े समूह का जनक और नेतृत्वकर्ता है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी शामिल है, जो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल है।
मजे की बात ये है कि एक पशु चिकित्सक डा.मोहन भागवत वर्तमान में आरएसएस के सुप्रीमो ( सरसंघचालक) हैं, जैसे बसपा की बहनन मायावती, सपा के अखिलेश यादव, टीएमसी की बहन ममता बनर्जी या आप के अरबिन्द केजरीवाल हैं.संघ में दत्तात्रेय होसबाले सरकार्यवाह यानि महासचिव के रूप में कार्यरत हैं.
सौ साल पहले 27 सितंबर 1925 को स्थापित, इस संगठन का प्रारंभिक उद्देश्य चरित्र निर्माण करना और “हिंदू अनुशासन” स्थापित करना था, ताकि हिंदू समुदाय को संगठित कर एक हिंदू राष्ट्र की स्थापना की जा सके. यह संगठन हिंदुत्व की विचारधारा के प्रसार के माध्यम से हिंदू समुदाय को “सशक्त” बनाने तथा भारतीय संस्कृति और उसकी “सभ्यतागत मूल्यों” को बनाए रखने का लक्ष्य रखता है।
आरएसएस को “हिंदू श्रेष्ठतावाद” के सिद्धांत पर आधारित संगठन के रूप में भी वर्णित किया गया है। इस पर अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के प्रति असहिष्णुता के आरोप भी लगाए गए हैं. ये आरोप सच भी हैं क्योंकि आज देश की संसद के दोनों सदनों में भाजपा का एक भी मुस्लिम सांसद या 20 राज्यों में एक भी मुस्लिम विधायक नहीं है.
ग्वालियर संघ की नर्सरी रहा है. ग्वालियर के शासक आजादी के पहले से संघ पर मेहरबान रहे हैं. आजादी के बाद ग्वालियर के सिंधिया राज परिवार ने संघ को अपनी तमाम संपत्ति स्कूल और महाविद्यालय चलाने के लिए दी. अब संघ के स्वयंसेवक डा. मोहन यदव के मुख्यमंत्री रहते संघ को ग्वालियर में आनन फानन में विश्वविद्यालय के लिए वाछित जमीन मिल गई.
संघ के पास स्वयंसेवकों की एक बडी अर्धसैन्य शक्ति है.2016 की संघ गणना के मुताबिक देश विदेश में संघ की 56869 शाखाएं और कोई 60 लाख शाखामृग यानि स्वयंसेवक है. इनमें स्कालर कम लठैत ज्यादा हैं. इसीलिए संघ ने वर्षों पहले विश्वविद्यालय खोलने की योजना बनाई थी जो सौवें साल में आकार ले रही है. कायदे से ये विश्वविद्यालय महाराष्ट्र में खुलना चा था किंतु संघ ने अब मप्र को ही महाराष्ट्र बना लिया है. इसलिए मप्र को ये मौक दिया गया है.
अभी संघ को तमाम विश्वविद्यालयों में ऐसे शाखामृगों को कुलगुरू बनाना पडा जो अयोग्य हैं. जिनके पास पीएचडी की उपाधि नही है. अब जब संघ क अपना विश्वविद्यालय होगा तो चाहे जितने स्कालर तैयार किए जा सकेंगे. आपको बता दें कि संघ ने वर्षों पहले मप्र में अटल बिहारी बाजपेई के नाम से एक हिंदी विश्वविद्यालय खोला था लेकिन वो शाखामृगों की अपेक्षित फौज कहें या नस्ल तैयार नहीं कर सका.
देश के दूसरे राजनीति दल अपनी विचारधारा के विस्तार के लिए स्कूल, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय खोलने की कल्पना भी नहीं कर सकते, किंतु संघ और भाजपा इस मामले में सबसे आगे हैं. मैं संघ को उसकी दूरदृष्टि के लिए बधाई और शुभकामनायें देता हूँ.@ राकेश अचल

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