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फैसले की सौदेबाजी का हुआ पर्दाफाश, 20 हजार की रिश्वत लेते एडीएम कार्यालय का रीडर रंगे हाथ गिरफ्तार


सिवनी। जनता की फरियाद पर सौदेबाजी करने वालों के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई एक बड़ा संदेश बनकर सामने आई है। लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने सिवनी स्थित एडीएम कार्यालय में पदस्थ रीडर माधव प्रसाद तिवारी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार, ग्राम गंगाखेड़ा निवासी शिकायतकर्ता संतोष सिंह सिसोदिया की एक अपील एडीएम कार्यालय में लंबित थी। आरोप है कि प्रकरण में राहत एवं पक्ष में निर्णय कराने के नाम पर रीडर माधव प्रसाद तिवारी ने पहले 30 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। बाद में सौदा 20 हजार रुपये में तय हुआ। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना लोकायुक्त जबलपुर को दी।

लोकायुक्त पुलिस महानिदेशक योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश तथा पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने शिकायत का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने के बाद योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की गई।

16 जून 2026 को जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी को 20 हजार रुपये की रिश्वत की राशि सौंपी, लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई।

इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है। क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि एक रीडर फैसले को प्रभावित करने के नाम पर रिश्वत मांग रहा था, तो क्या यह केवल एक व्यक्ति का मामला है या फिर व्यवस्था में गहराई तक फैली भ्रष्ट मानसिकता का हिस्सा है।

आय से अधिक संपत्ति की जांच की भी उठी मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और आय के स्रोतों की विस्तृत जांच की जानी चाहिए। वर्षों से पदस्थ कर्मचारियों की वास्तविक आय और उनकी संपत्ति का मिलान किया जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह मामला केवल ट्रैप कार्रवाई तक सीमित रहेगा या फिर आरोपी की संपत्ति, उसके संपर्कों और पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर उच्च स्तर तक जवाबदेही तय की जाएगी। लोकायुक्त की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि सरकारी पद जनता की सेवा के लिए है, न कि सौदेबाजी और रिश्वतखोरी के लिए।

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