“रीवा की चर्चित DSP ख्याति मिश्रा की हाइट पर हाईकोर्ट तक संग्राम: पति ने लगाया 2 सेंटीमीटर हेरफेर का आरोप, भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल”
मध्य प्रदेश की चर्चित महिला पुलिस अधिकारी और रीवा में पदस्थ डीएसपी ख्याति मिश्रा एक नए विवाद के कारण सुर्खियों में आ गई हैं। मामला उनकी ऊंचाई (हाइट) से जुड़ा है, जिसे लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खास बात यह है कि आरोप किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी या बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उनके पति और वर्तमान तहसीलदार शैलेंद्र बिहारी शर्मा ने लगाए हैं। विवाद इतना बढ़ गया कि मामला अब हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है।
पति का आरोप है कि डीएसपी ख्याति मिश्रा की वास्तविक लंबाई भर्ती के लिए तय मानकों से कम थी, लेकिन कथित तौर पर दस्तावेजों और मेडिकल परीक्षण में हेरफेर कर नौकरी प्राप्त की गई। उन्होंने अदालत से मांग की है कि डीएसपी की दोबारा मेडिकल बोर्ड से लंबाई नपवाई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश पुलिस सेवा में डीएसपी पद के लिए महिलाओं की न्यूनतम लंबाई 155 सेंटीमीटर निर्धारित है। पुरुष अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा 168 सेंटीमीटर तय है। हालांकि कुछ आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट मिलती है।
तहसीलदार शैलेंद्र बिहारी शर्मा का आरोप है कि उनकी पत्नी ख्याति मिश्रा की वास्तविक ऊंचाई निर्धारित मानदंड से लगभग 2 सेंटीमीटर कम है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से गलत तरीके से लंबाई दर्ज करवाई गई और इसी आधार पर नौकरी हासिल की गई।
उन्होंने इस मामले में विस्तृत शिकायत करते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो “सच्चाई सामने आ जाएगी”। शिकायत में मेडिकल परीक्षण की पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
हाई कोर्ट तक क्यों पहुंचा मामला?
बताया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। याचिका में दोबारा मेडिकल परीक्षण और भर्ती रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि अदालत दोबारा माप कराने का आदेश देती है और आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बन सकता है।
“ज्योति मौर्य कांड” से क्यों जोड़ा जा रहा?
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस विवाद की तुलना चर्चित “ज्योति मौर्य कांड” से की जा रही है। वजह यह है कि यहां भी पति-पत्नी के रिश्ते में दरार के बाद निजी आरोप सार्वजनिक और कानूनी विवाद में बदलते दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे “प्रेम, प्रतिष्ठा और प्रतिशोध” की कहानी के रूप में पेश किया जा रहा है। कई लोग इसे व्यक्तिगत वैवाहिक विवाद बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सरकारी भर्ती प्रक्रिया की गंभीर जांच का विषय मान रहे हैं।
प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल
मामले के सार्वजनिक होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। यदि जांच आगे बढ़ती है तो संबंधित भर्ती बोर्ड, मेडिकल परीक्षण प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
फिलहाल डीएसपी ख्याति मिश्रा की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, कानूनी प्रक्रिया जारी रहने के कारण प्रशासन भी खुलकर टिप्पणी करने से बच रहा है।
क्या कहते हैं नियम?
- मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती नियमों के अनुसार:
- महिला उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम लंबाई: 155 सेंटीमीटर
- पुरुष उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम लंबाई: 168 सेंटीमीटर
- कुछ आरक्षित वर्गों को नियम अनुसार छूट उपलब्ध
- मेडिकल परीक्षण और शारीरिक माप भर्ती प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा
यदि किसी उम्मीदवार द्वारा गलत जानकारी देने या माप में हेरफेर साबित होता है, तो नियुक्ति निरस्त होने तक की कार्रवाई संभव है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत यदि दोबारा मेडिकल परीक्षण का आदेश देती है तो यह मामला और अधिक चर्चित हो सकता है। साथ ही यह भी तय होगा कि आरोप केवल पारिवारिक विवाद का हिस्सा हैं या वास्तव में भर्ती प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई थी।
फिलहाल यह मामला मध्य प्रदेश में प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है।

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