नई व्यवस्था के अनुसार राजधानी भोपाल स्थित विभागीय मुख्यालय के रेस्ट हाउसों का आरक्षण प्रमुख अभियंता कार्यालय के माध्यम से किया जाएगा। वहीं जिला स्तर पर कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) को यह जिम्मेदारी दी गई है।
बताया जा रहा है कि अब तक कई स्थानों पर एसडीएम और तहसीलदार स्तर से रेस्ट हाउस आवंटित किए जा रहे थे, जबकि इन भवनों का रखरखाव और संचालन लोक निर्माण विभाग के अधीन ही है। इससे समन्वय की समस्या सामने आ रही थी।
पारदर्शिता और नियंत्रण: यह निर्णय रेस्ट हाउसों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और प्रशासनिक हस्तक्षेप को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। पहले से चली आ रही अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए यह नियम सख्ती से लागू किया जा रहा है। साथ ही विश्राम गृहों के संचालन और रखरखाव में भी सुविधा मिलेगी।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं, जिनके तहत सर्किट हाउस और रेस्ट हाउस के आवंटन अधिकारों को लेकर नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
ऑनलाइन बुकिंग (हिमाचल/यूपी आदि): कई राज्यों में रेस्ट हाउसों की बुकिंग अब ऑनलाइन भी कर दी गई है, जहाँ 50% राशि एडवांस जमा करनी होती है। 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर बुकिंग की पुष्टि की जा रही है।

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