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आधी रात ड्यूटी से लौट रहे पटवारी की बाईक भिड़ी ट्रॉली से गंभीर रूप से हुआ घायल : टार्गेट के दबाव ने छीनी सुरक्षा, हरदा से इंदौर रेफर

हरदा। प्रदेश में पटवारियों पर बढ़ते काम के बोझ और लगातार मिल रहे टार्गेट अब जानलेवा साबित होने लगे हैं। हरदा जिले में सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए। ड्यूटी पूरी कर देर रात घर लौट रहे पटवारी की बाइक सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से जा भिड़ी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ग्राम कुकरावद के पास सुल्तानपुर फाटे पर हुई। घायल पटवारी रमेश नाग मगरधा क्षेत्र में पदस्थ हैं। बताया जा रहा है कि वे देर रात तक सरकारी काम निपटाने के बाद बाइक से हरदा लौट रहे थे। इसी दौरान सुल्तानपुर स्थित गोमती वेयरहाउस के बाहर अंधेरे में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली दिखाई नहीं दी और उनकी बाइक सीधे ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पटवारी सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।

108 एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया, हालत गंभीर

हादसे के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को सूचना दी। घायल रमेश नाग को हरदा जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए इंदौर रेफर कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें अंदरूनी चोटें आई हैं। फिलहाल उनका इलाज इंदौर में जारी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

“टार्गेट पूरा करो” के दबाव में टूट रहे पटवारी

इस घटना ने एक बार फिर राजस्व विभाग में पटवारियों पर बढ़ते कार्यभार की पोल खोल दी है। पटवारियों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा लगातार टार्गेट देकर काम कराया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें देर रात तक फील्ड में रहना पड़ रहा है।

वर्तमान में सीमांकन, फार्मर रजिस्ट्री, सीएम हेल्पलाइन, राजस्व प्रकरणों की रिपोर्ट, रिकॉर्ड अपडेट और अन्य सरकारी कार्यों का भारी दबाव है। भीषण गर्मी में जहां किसान दोपहर 11 बजे से शाम 5 बजे तक बाहर निकलने से बच रहे हैं, वहीं पटवारियों को मजबूरी में गांव-गांव जाकर काम करना पड़ रहा है।

इतना ही नहीं, अवकाश के दिनों में भी उन्हें लगातार ड्यूटी करनी पड़ रही है। लगातार तनाव, मानसिक दबाव और आराम की कमी का असर अब उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा पर साफ दिखाई देने लगा है।

पटवारियों में बढ़ रहा आक्रोश

पटवारी कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय दबाव के कारण उनकी निजी जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो रही है। समय पर भोजन, आराम और परिवार तक के लिए समय नहीं मिल पा रहा। देर रात तक काम और लगातार फील्ड ड्यूटी उन्हें दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य संबंधी खतरों की ओर धकेल रही है।

हरदा की यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जिसमें सरकारी कर्मचारियों से लगातार काम तो लिया जा रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय परिस्थितियों की अनदेखी की जा रही है।

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