प्राप्त जानकारी के अनुसार एक RTI कार्यकर्ता ने 23 अप्रैल 2026 को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत गेहूं उपार्जन कार्य से संबंधित जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में 15 मई 2026 को लोक सूचना अधिकारी द्वारा पत्र जारी किया गया। पत्र में उल्लेख किया गया कि आवेदन के बिंदु क्रमांक 1 से 3 तक की जानकारी कुल संख्या (98) पृष्ठों में उपलब्ध है, जिसकी राशि प्रति पेज 2/- रुपये के मान से कुल 196/- रुपये जमा करना होंगे।
पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि राशि “MPRAF-SRLM-NRLM” बैंक नाम/ब्रांच PNB, BHOPAL EPSO 462016, आईएफएससी कोड PUNB0631000, खाता क्रमांक 6310000100008207 में जमा कराई जाए। लेकिन जब RTI कार्यकर्ता ने उक्त खाते में राशि जमा करने का प्रयास किया तो भुगतान नहीं हो पाया। बाद में जानकारी मिली कि संबंधित PFMS खाता 7 अगस्त 2025 से ही बंद पड़ा हुआ है।
इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। RTI कार्यकर्ता का आरोप है कि विभाग जानबूझकर बंद खाते की जानकारी पत्र में देकर आवेदक को भ्रमित कर रहा था ताकि जानकारी देने में देरी की जा सके। आवेदक ने बताया कि राशि जमा नहीं होने पर वह जिला पंचायत परिसर स्थित एनआरएलएम शाखा हरदा पहुंचा और अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया कि पत्र में दिया गया खाता अमान्य है तथा उसमें राशि जमा नहीं हो रही।
बताया जाता है कि बाद में विभागीय अधिकारियों ने दूसरा खाता उपलब्ध कराया और यह स्वीकार किया कि पहले वाला खाता काफी समय से बंद है। इसके बावजूद बंद खाते का विवरण आधिकारिक पत्र में दर्ज किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों का कहना है कि गेहूं खरीदी से संबंधित जानकारी सार्वजनिक होने से विभागीय जिम्मेदारों के “पसीने छूट रहे हैं”, जिसके चलते तकनीकी बहानों और गलत खातों के माध्यम से आवेदक को परेशान करने की कोशिश की जा रही है। RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, लेकिन यदि विभाग इस प्रकार के हथकंडे अपनाएंगे तो आम नागरिकों का भरोसा व्यवस्था से उठ जाएगा।
अब पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। RTI कार्यकर्ताओं ने सवाल किया है कि जब खाता अगस्त 2025 से बंद था तो मई 2026 में उसी खाते में राशि जमा कराने का आदेश क्यों जारी किया गया। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की जा रही है।

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