हरदा। बैलगाड़ी दौड़ की दुनिया में अपनी अद्भुत रफ्तार और शानदार प्रदर्शन से अलग पहचान बनाने वाले प्रसिद्ध बैल "भोला" का निधन हो गया। उसके निधन से न केवल उसके गृह ग्राम छोटी हरदा, बल्कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के हजारों बैलगाड़ी दौड़ प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। जेवल्या कृषि फार्म, छोटी हरदा में बैलगाड़ी दौड़ प्रेमियों एवं गौ पालकों ने पुष्पवर्षा कर भोला को भावभीनी अंतिम विदाई दी।
गौ पालक सेवक विजय जेवल्या ने बताया कि खेल जगत में कुछ खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के कारण इतिहास के पन्नों में अमर हो जाते हैं। बैलगाड़ी दौड़ के क्षेत्र में "भोला" भी ऐसा ही एक नाम था, जिसने अपनी असाधारण गति और निरंतर जीत के दम पर स्वयं को बैलगाड़ी दौड़ का राजा साबित किया।
रफ्तार का बेताज बादशाह
भोला केवल एक बैल नहीं था, बल्कि रेसिंग ट्रैक का ऐसा सितारा था जिसकी मौजूदगी मात्र से प्रतियोगिताओं का रोमांच बढ़ जाता था। जब भी वह मैदान में उतरता, दर्शकों की निगाहें उसी पर टिक जाती थीं। उसकी फुर्ती और गति ने उसे कम समय में ही बैलगाड़ी दौड़ की दुनिया का लोकप्रिय और सम्मानित नाम बना दिया था।
मध्य प्रदेश में कायम की बादशाहत
भोला के नाम मध्य प्रदेश में सैकड़ों पुरस्कार जीतने का गौरव दर्ज है। विशेष रूप से ग्राम बिच्छापुर में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता में उसने लगातार पांच वर्षों तक प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। हर वर्ष नए प्रतिद्वंद्वी और नई रणनीतियां सामने आईं, लेकिन भोला की बादशाहत को कोई चुनौती नहीं दे सका।
महाराष्ट्र में भी लहराया जीत का परचम
महाराष्ट्र की बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिताएं अपनी कठिन प्रतिस्पर्धा के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में भी भोला ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। भंडारा जिले में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल द्वारा आयोजित बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता में भोला ने अपने साथी बैलों प्रशांत और रणवीर के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम एवं द्वितीय दोनों पुरस्कार हासिल किए। 1200 फीट लंबी इस दौड़ में एक ही प्रतियोगिता में दो पुरस्कार जीतने का यह अनोखा रिकॉर्ड आज भी चर्चा का विषय है।
एक गौरवशाली युग का अंत
भोला ने अपने जीवनकाल में कभी अपने मालिकों और संरक्षकों—जेवल्या परिवार, छोटी हरदा—को निराश नहीं किया। उसने अपने गांव, क्षेत्र और प्रदेश का नाम अनेक बार गौरवान्वित किया। उसके निधन के साथ बैलगाड़ी दौड़ के एक गौरवशाली अध्याय का अंत हो गया है।
खेतों की मिट्टी से लेकर रेसिंग ट्रैक तक अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले बैलगाड़ी दौड़ के इस महान चैंपियन को सभी ने अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित प्रमुख लोगों में रामभरोस जेवल्या, लक्ष्मीनारायण जेवल्या, कपिल राजू, राहुल जेवल्या, पवन जेवल्या, जगदीश पटेल, छोटू पटेल (कायागांव), राजेश पंवार (जामली), छोटू पटेल (धनवानी), महेन्द्र पटेल, रामपाल सिरोही, राजेश सिरोही (भुवनखेड़ी), पदम पटेल (मगरिया), चिमनाजी बांता (लोरास), पूनम गीला (नीमगांव), छोटूजी मातवा (देवतालाव) सहित हरदा जिले के अनेक गौ पालक, किसान एवं बैलगाड़ी दौड़ प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने पुष्प अर्पित कर अपने प्रिय चैंपियन "भोला" को अंतिम प्रणाम किया।

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