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आरक्षित निधि से आहरण के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, टिमरनी नगर परिषद की आर्थिक स्थिति पर जताई चिंता

टिमरनी। नगर परिषद टिमरनी की साधारण सभा की बैठक गुरुवार, 2 जुलाई को आयोजित होने जा रही है। बैठक के लिए जारी एजेंडे में नगर परिषद की आरक्षित (संचित) निधि से आहरण संबंधी प्रस्ताव शामिल किए जाने पर नगर कांग्रेस कमेटी ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने इसे परिषद की खराब आर्थिक स्थिति का संकेत बताते हुए परिषद के वित्तीय प्रबंधन और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

नगर कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने आरोप लगाया कि नगर परिषद पिछले तीन वर्षों से विकास कार्यों और विभागीय खरीदी के नाम पर भारी भ्रष्टाचार कर रही है। उन्होंने कहा कि दैनिक वेतनभोगियों के फर्जी मस्टर रोल बनाए जा रहे हैं तथा प्रतिमाह डीजल खरीदी में भी व्यापक अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हो रहा है। इन कारणों से परिषद की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती गई है और अब उसकी नजर आरक्षित निधि पर पहुंच गई है।

जायसवाल का कहना है कि यदि परिषद को आरक्षित अथवा संचित निधि से राशि आहरित करने की स्वीकृति मिल जाती है, तो नगर परिषद की जमा पूंजी समाप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जबकि परिषद को प्रतिमाह चुंगी क्षतिपूर्ति, टैक्स तथा अन्य मदों से शासन से लाखों रुपये प्राप्त होते हैं। इसके अलावा स्वच्छता, जल संवर्धन और अन्य योजनाओं के लिए करोड़ों रुपये का अनुदान भी मिलता है, बावजूद इसके परिषद मनमाने ढंग से खर्च कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जहां एक हजार रुपये खर्च होने चाहिए, वहां दस हजार रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। पिछले वर्षों में विभागीय खरीदी के नाम पर लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले विभागीय जांच में सिद्ध होने के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने से परिषद के हौसले बढ़ गए हैं।

नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने परिषद को सलाह देते हुए कहा कि आरक्षित निधि से राशि निकालने के बजाय अनावश्यक खर्चों में कटौती की जाए, फर्जी मस्टर रोल बंद किए जाएं, निर्माण कार्यों में कथित फर्जी मापदंडों के आधार पर किए जा रहे भुगतान रोके जाएं तथा विभागीय खरीदी में पारदर्शिता लाई जाए। इससे परिषद की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग भी रुकेगा।

उन्होंने प्रतिमाह होने वाली डीजल खरीदी की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि भाजपा-शासित नगर परिषद बहुमत के आधार पर आरक्षित अथवा संचित निधि से आहरण का प्रस्ताव पारित करती है, तो कांग्रेस इसका विरोध करेगी और नगर परिषद में कथित भ्रष्टाचार तथा अन्य मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी।

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