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15 साल पुराने फ्रैक्चर का होगा इलाज, जनभागीदारी शिविर में मिश्रीबाई को मिली नई उम्मीद

मोबाइल एक्स-रे मशीन से खुला दर्द का राज, कलेक्टर ने दिए तत्काल उपचार के निर्देश

हरदा (सार्थक जैन)। जिले में आयोजित जनभागीदारी सप्ताह के तहत ग्राम रेसलपुर में लगे लाभार्थी संतुष्टि शिविर ने एक आदिवासी महिला की जिंदगी में नई उम्मीद जगा दी। लगभग 15 वर्षों से टूटे हाथ के दर्द को सह रही मिश्रीबाई को शिविर में न सिर्फ बीमारी का पता चला, बल्कि अब उसका निःशुल्क उपचार भी कराया जाएगा।

‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान’ एवं ‘प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान’ के अंतर्गत जिले में 18 से 25 मई तक लाभार्थी संतुष्टि शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। बुधवार को रेसलपुर में आयोजित शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा था। विशेष रूप से यहां मोबाइल एक्स-रे मशीन भी लगाई गई थी।

इसी दौरान करीब 50 वर्षीय मिश्रीबाई स्वास्थ्य जांच के लिए शिविर पहुंची। चिकित्सकों की नजर उनके टेढ़े हाथ पर पड़ी तो तत्काल एक्स-रे कराया गया। जांच में सामने आया कि महिला के हाथ में पुराना फ्रैक्चर है। पूछताछ में मिश्रीबाई ने बताया कि 15 साल पहले फिसलकर गिरने से उनका हाथ टूट गया था, लेकिन आर्थिक और संसाधनों की कमी के कारण कभी इलाज नहीं करा सकीं।

कलेक्टर सिद्धार्थ जैन की मौजूदगी में जब यह मामला सामने आया तो उन्होंने तुरंत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को महिला का समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह ने बताया कि आयुष्मान कार्डधारी मिश्रीबाई का जिला अस्पताल में निःशुल्क ऑपरेशन कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भोपाल रेफर कर वहां भी मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

शिविर के दौरान कलेक्टर श्री जैन ने ग्रामीणों की समस्याएं भी सुनीं और संबंधित विभागों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती पारूल जैन ने बताया कि शिविर में विभिन्न योजनाओं के तहत ग्रामीणों को लाभ पहुंचाया गया। जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और आयुष्मान योजना सहित कुल 18 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

रेसलपुर का यह शिविर प्रशासन की संवेदनशीलता और जनकल्याणकारी योजनाओं के धरातल पर असर का जीवंत उदाहरण बन गया, जहां एक महिला को 15 साल पुराने दर्द से राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

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