ग्रामीणों के अनुसार मुक्तिधाम तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह कच्चा है, जिससे विशेष रूप से बरसात के दिनों में स्थिति बेहद खराब हो जाती है। कीचड़ और फिसलन भरे रास्तों के कारण अंतिम यात्रा निकालने में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार लोगों को शव वाहन के बजाय कंधों पर शव ले जाकर मुक्तिधाम तक पहुंचना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए राशि स्वीकृति की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण शुरू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मुक्तिधाम तक पक्का पहुंच मार्ग बनाकर लोगों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि अंतिम यात्रा जैसी संवेदनशील स्थिति में किसी को परेशानी न उठानी पड़े।

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