व्यापारियों की शीर्ष संस्था कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में देश का ऑनलाइन कारोबार करीब 3,000 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026 तक 18,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यानी चार वर्षों में ऑनलाइन कारोबार में लगभग छह गुना वृद्धि होने की संभावना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल ऑनलाइन कारोबार में 30 से 35 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रॉनिक एवं होम अप्लायंस उत्पादों की है। वहीं 20 से 25 प्रतिशत फैशन और लाइफस्टाइल, 15 से 20 प्रतिशत किचन उत्पाद, 6 से 7 प्रतिशत ब्यूटी एवं पर्सनल केयर तथा 5 से 7 प्रतिशत फर्नीचर की ऑनलाइन बिक्री हो रही है। इसके अलावा ट्रैवल और टिकटिंग सेवाओं का हिस्सा भी बढ़कर 10 से 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
सरकार को भेजा पत्र
कैट मध्यप्रदेश के जिला अध्यक्ष सरगम जैन ने बताया कि संस्था ने ऑनलाइन व्यापार के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर सरकार को पत्र लिखकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि ई-कॉमर्स के बढ़ते विस्तार से पारंपरिक व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है।
बाजारों की रौनक हो रही कम
कैट का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी के कारण बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही लगातार घट रही है, जिससे व्यापारियों के सामने नकदी प्रवाह का संकट खड़ा हो रहा है। व्यापारियों का तर्क है कि यदि ग्राहक अपनी अधिकांश जरूरत का सामान घर बैठे ही मंगा लेंगे, तो वे बाजार नहीं आएंगे। इससे केवल एक उत्पाद की बिक्री ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े अन्य व्यवसायों की पूरी श्रृंखला भी प्रभावित हो रही है। संस्था का मानना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो पारंपरिक व्यापार को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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